बुधवार, 21 अगस्त 2013

उत्तराखंड त्रासदी

भूमिका - आज के इस देश के वातावरण में चंदू ओर जब अधर्म का बोलबाला है, जनता साधू, सज्जन सभी त्रस्त है तब मुझे महापुरुषों की आवश्यकता अधिक लगती है श्री कृष्ण के समान आस्था है।

देश उबल नहीं पाता है क्यूँ  
देश जलाती खबरों  से
गांधी,टोपे, बोस, भगत, तुम
आ जाओ अब  कबरों से

1- शीश  कटाता हेमराज भी, भगत बड़ा बलिदानी था।
आँखों में शोणित भरा हुआ था , वीरों की नई कहानी था।

2  -  मातृभूमि से बोला झुककर, पग पीछे नहीं हटाऊँगा।
देश नहीं बटने दूंगा, चाहे अंग अंग मै कट जाऊँगा

3  - शीश कटा जब माँ ने देखा, तब माँ का मन भी हर्षाया था।
आँखों में वीर सपूतों के तब लाल रक्त ही भर आया था।

 
4  - पर बोलो कौन विवषता थी तुम, ऐसे क्यों गमगीन हुए।
मातृभूमि की कसम उठाकर, धमकी से भी हीन हुए। 

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