बुधवार, 28 अगस्त 2013

Krishna Janmastami Kavita

चक्र सुदर्शन  लेकर आना -२ कान्हा फिर तुम हाथ मैं
 कंस  बहुत  से  छुपे  हुए  हैं ,  नेताओं की जात मैं 
 भारत माँ की लाज लूटते -२ हर पल रहते घ़ात  मैं 
कंस  बहुत  से  छुपे  हुए  हैं ,  नेताओं की जात मैं

 
 तार तार करते  हैं भारती की आबरू को ,चीर खिंच खिंच कर धज्जियां उड़ाते हैं 
 नेता मेरे देश के वोटों के दलाल हुए ,इन्हें देशभक्ति के गीत नहीं भाते हैं 
लूट और डकेती हत्या के आरोपी भी ,कान्हा मेरे देश मैं मंत्री बन जाते हैं 
फिर इनके दर्शन भी दुर्लभ हैं हो जाते ,तब ये  दिखाई देते  जब चुनाव आते हैं 
पांच साल तक मौज उड़ाते , सर्दी गर्मी बरसात मैं 
कंस  बहुत  से  छुपे  हुए  हैं , नेताओं की जात मैं 

महंगाई भ्रस्टाचार से हैं सभी परेशान ,नौजवान ठोकर खाते नौकरी की खोज मैं 
लूट और हत्या अब हो गयी है सरेआम ,खबरों मैं देखता बलात्कार रोज मैं 
चाहे जहाँ अपराधी खुलेआम घूमते हैं ,न्याय बिक जाता यहाँ नोटों की डोज मैं 
कैसे हो प्रकाश अब देश का विकाश अब , रूपया दबा हुआ है डॉलर के बोझ मैं 
तुम आकर सरकार बना लो बलदाऊ के साथ मैं 
कंस  बहुत  से  छुपे  हुए  हैं ,  नेताओं की जात मैं 


Kavi Dharmendra Jain  "Lovely"
9911021399

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें